Uttarakhand: उत्तराखंड के मंत्री ने हरीश रावत की तुलना ‘दुष्ट’ से की, राम भजन करने की सलाह

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उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी सुर्खियों में है। इस बार वन मंत्री सुबोध उनियाल ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की आलोचना करते हुए उन्हें “दुष्ट” बताया और साथ ही घर पर रहकर राम भजन करने की सलाह दी।सुबोध उनियाल और हरीश रावत कभी समान राजनीतिक दल में मंत्री रहे हैं, लेकिन उनके संबंध हमेशा से बेहतर नहीं रहे। हाल ही में रावत द्वारा मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी पर की गई टिप्पणी के बाद उनियाल ने अपनी प्रतिक्रिया दी।

क्या कहा सुबोध उनियाल ने

मीडिया से बातचीत में, हल्द्वानी स्थित वन प्रशिक्षण संस्थान (FTI) परिसर में सुबोध उनियाल ने कहा कि हरीश रावत की उम्र अब वानप्रस्थ ग्रहण करने की हो गई है। उन्होंने कहा:

  • “हरीश रावत को अब घर पर रहकर राम भजन करना चाहिए।”
  • उन्होंने दावा किया कि उन्होंने पहले भी रावत को 2017 और 2022 के चुनावों से पहले राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दी थी।
  • उनियाल ने कहा कि रावत की उम्र और अनुभव देखते हुए, राजनीति में सक्रिय रहना उनके लिए उपयुक्त नहीं है।

सुबोध उनियाल ने रावत की तुलना दुष्ट से की और कहा कि उनका कभी भी दुष्टों का साथ नहीं रहा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि रावत को उनकी सलाह मानकर अब आराम और मानसिक शांति लेनी चाहिए।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और सियासी विवाद

हरीश रावत उत्तराखंड कांग्रेस के बड़े नेता हैं और उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली है। इसके विपरीत, सुबोध उनियाल भाजपा के वन मंत्री हैं।

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हाल ही में रावत ने कहा था कि वे 2027 के चुनाव में ढोल बजाएंगे, जिसका जवाब उनियाल ने व्यंग्य और सलाह के रूप में दिया। इस बयान ने उत्तराखंड की राजनीति में चर्चा का नया विषय खड़ा कर दिया है।

उत्तराखंड की सियासत में अक्सर इस तरह के व्यक्तिगत और व्यंग्यात्मक बयान सामने आते रहे हैं, जो मीडिया और जनता के बीच गर्म चर्चा का कारण बनते हैं। हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्र के लोग इस तरह की बयानबाजी को लेकर हमेशा से संवेदनशील रहते हैं।

निष्कर्ष

सुबोध उनियाल और हरीश रावत के बीच यह विवाद राजनीतिक बयानबाजी का एक नया उदाहरण है।

  • रावत के चुनावी दावों पर उनियाल का पलटवार सुर्खियों में है।
  • मंत्री ने रावत को राजनीति से संन्यास लेने और राम भजन करने की सलाह दी।
  • यह घटना उत्तराखंड की सियासत में व्यक्तिगत बयान और राजनीतिक सलाह के मिश्रण को दर्शाती है।
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