शिक्षक दिवस पर उत्तराखंड के स्कूली शिक्षा तंत्र के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। लंबे समय से बेसिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी से जूझ रहे बच्चों और अभिभावकों को अब जल्द ही 2100 नए बेसिक शिक्षक मिलने वाले हैं। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने शुक्रवार को राजभवन में आयोजित शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार समारोह के बाद मीडिया से बातचीत में इसकी जानकारी दी।
भर्ती प्रक्रिया और बदलाव
सरकार जल्द ही प्राथमिक शिक्षक सेवा नियमावली में संशोधन की प्रक्रिया पूरी कर लेगी। इसके बाद जिलावार भर्ती शुरू की जाएगी। इस भर्ती के बाद प्रत्येक बेसिक स्कूल में कम से कम दो शिक्षक अनिवार्य रूप से तैनात किए जाएंगे।
प्रमोशन और रिक्त पदों की पूर्ति
- 2815 प्रवक्ता पदों पर एलटी शिक्षकों को अंतरिम प्रमोशन दिया जाएगा।
- हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापक के 830 रिक्त पद भी वरिष्ठ एलटी और प्रवक्ता कैडर के शिक्षकों के जरिए भरे जाएंगे।
- इसके लिए सरकार हाईकोर्ट में अपील करने की तैयारी कर रही है, ताकि प्रमोशन प्रक्रिया में कानूनी अड़चन दूर हो सके।
यह कदम न केवल शिक्षकों के मनोबल को बढ़ाएगा बल्कि छात्रों को भी स्थायी और अनुभवी अध्यापक उपलब्ध कराएगा।
शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों में सख्ती
शिक्षा मंत्री ने सिर्फ शिक्षा विभाग ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं पर भी सख्ती दिखाई। उन्होंने बताया कि लंबे समय से गैरहाजिर चल रहे 234 डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। इसके अलावा, 55 और डॉक्टरों की सेवाएं भी खत्म करने के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम सरकार की उस नीति को दर्शाता है जिसमें अनुशासन और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
क्यों जरूरी है यह भर्ती?
उत्तराखंड के दूरस्थ पहाड़ी इलाकों में शिक्षा की स्थिति हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही है। कई गांवों में आज भी बच्चे कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचते हैं। लेकिन वहां भी अक्सर शिक्षकों की कमी उनकी पढ़ाई में सबसे बड़ी बाधा बन जाती है।
मेरी राय में, यह भर्ती सिर्फ स्कूलों में खाली पड़े पद भरने का मामला नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण बच्चों के भविष्य से सीधा जुड़ा मुद्दा है। खासकर पहाड़ी जिलों जैसे पिथौरागढ़, चंपावत, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में शिक्षक की तैनाती का मतलब है— शिक्षा की रोशनी हर घर तक पहुंचना।
शिक्षकों की भूमिका और समाज की उम्मीदें
शिक्षक दिवस पर यह घोषणा एक सकारात्मक संदेश देती है। शिक्षक सिर्फ किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि वे बच्चों में संस्कार, जिम्मेदारी और आत्मविश्वास भी पैदा करते हैं।
शैलेश मटियानी, जिनके नाम पर यह पुरस्कार दिया जाता है, खुद पहाड़ के संघर्ष और संवेदनाओं को अपनी कहानियों में जीवंत करने वाले साहित्यकार थे। यह उनकी विचारधारा से भी मेल खाता है कि गांव और समाज की नींव शिक्षा और संस्कार से ही मजबूत होती है।
निष्कर्ष
2100 नए बेसिक शिक्षकों की भर्ती, 2815 शिक्षकों के प्रमोशन और 830 प्रधानाध्यापक पदों की पूर्ति निश्चित रूप से उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था में नई ऊर्जा भरने वाला कदम है।
हालांकि, असली चुनौती अब भी बाकी है— यह सुनिश्चित करना कि ये शिक्षक सिर्फ शहरी या आसान इलाकों में ही न टिकें, बल्कि कठिन और दूरस्थ क्षेत्रों तक भी पहुंचे। क्योंकि जब तक पहाड़ के हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं पहुंचेगी, तब तक उत्तराखंड का विकास अधूरा रहेगा।