Chakrata Woman Died: पहाड़ का दर्द: सड़क बंद होने से नहीं मिल पाया इलाज, रास्ते में ही महिला की मौत

Rishab Gusain
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Rishab Gusain is a Digital Marketing Executive and skilled content writer from Dehradun, Uttarakhand. With experience working for several national and international brands, he has helped...
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उत्तराखंड के पहाड़ सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी चुनौतियों के लिए भी जाने जाते हैं। चकराता (देहरादून) से आई एक खबर ने एक बार फिर पहाड़ी जीवन की कठिनाइयों को उजागर कर दिया है। यहां झबराड़ गांव की 65 वर्षीय संतो देवी इलाज न मिल पाने की वजह से रास्ते में ही जिंदगी की जंग हार गईं।

बुखार से पीड़ित थीं, सड़कें बंद होने से नहीं मिला इलाज

पिछले कई दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण सिलीखड्ड–कुनैन मोटर मार्ग भूस्खलन से बंद पड़ा था। इस वजह से ग्रामीणों को अस्पताल तक पहुंचना नामुमकिन हो गया। संतो देवी पांच दिनों से तेज बुखार से पीड़ित थीं, लेकिन बंद सड़कों के कारण समय पर इलाज नहीं हो पाया। आखिरकार जब उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई, तो ग्रामीणों ने उन्हें डंडी-कंडी (कंधों पर बनी लकड़ी की पालकी जैसे साधन) के सहारे गांव से नौ किलोमीटर पैदल मुख्य सड़क तक पहुंचाया।

रास्ते में ही तोड़ा दम

मुख्य मार्ग तक पहुंचने के बाद उन्हें 108 एंबुलेंस सेवा से चकराता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचने से पहले ही संतो देवी ने दम तोड़ दिया।

दूसरी महिला को भी पैदल लाना पड़ा

इसी इलाके के कुनैन गांव की दसी देवी भी गंभीर रूप से बीमार थीं। ग्रामीणों ने उन्हें 11 किलोमीटर तक डंडी-कंडी के सहारे पैदल रास्ता तय कर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। फिलहाल उनका इलाज विकासनगर में चल रहा है।

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पहाड़ का असली दर्द

यह घटना केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि पूरे पहाड़ की पीड़ा है। बारिश, भूस्खलन और टूटती सड़कों की वजह से हर साल दर्जनों गांव बाहरी दुनिया से कट जाते हैं। जिन रास्तों से स्कूल, अस्पताल और बाजार तक पहुंचा जाता है, वही रास्ते आपदा के मौसम में जानलेवा बन जाते हैं।

मैंने कई बार स्थानीय लोगों से सुना है कि बारिश शुरू होते ही उनके मन में डर बैठ जाता है—कहीं बीमार पड़ गए तो अस्पताल तक कैसे पहुंचेंगे? यह सवाल आज भी अनुत्तरित है।

सरकार और प्रशासन की चुनौती

सवाल उठता है कि आखिर कब तक पहाड़ के लोगों की जिंदगी सड़क बंद होने की कीमत चुकाती रहेगी? पहाड़ों में ऑल-वेदर रोड और वैकल्पिक मार्ग की योजनाएं अक्सर कागजों तक ही सीमित रह जाती हैं। छोटे-छोटे गांवों में हेल्थ सब-सेंटर और मोबाइल मेडिकल यूनिट्स की बेहद जरूरत है।

निष्कर्ष

संतो देवी की मौत केवल एक हादसा नहीं, बल्कि पहाड़ की उस हकीकत की तस्वीर है जिसे अक्सर पर्यटन की चमक के पीछे छिपा दिया जाता है। जरूरत है कि ऐसी घटनाओं से सबक लेकर प्रशासन ठोस कदम उठाए, ताकि अगली बार किसी की जान सड़क बंद होने के कारण न जाए।

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Rishab Gusain is a Digital Marketing Executive and skilled content writer from Dehradun, Uttarakhand. With experience working for several national and international brands, he has helped businesses achieve remarkable organic growth through his strategic digital marketing approach. Deeply connected to his roots, Rishab is passionate about showcasing the rich culture, travel destinations, and traditions of Uttarakhand. His engaging content has attracted a growing readership, hitting over 10,000 visits in just two months.
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