उत्तराखंड हमेशा से प्राकृतिक आपदाओं की मार झेलता आया है। खासकर ऊँचाई वाले क्षेत्र जैसे उत्तरकाशी जिले का धराली, हर्षिल और स्यानाचट्टी इलाका। हाल ही में आई मानसून आपदा ने यहां के लोगों की ज़िंदगी पूरी तरह से हिला दी। घर, खेत, बगीचे, सड़कें, पुल, और रोज़गार के साधन – सब कुछ प्रभावित हो गया।
इसी गंभीर स्थिति का जायजा लेने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त पीडीएनए (Post Disaster Needs Assessment) टीम गुरुवार को धराली पहुंची। टीम में विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे, जिन्होंने प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया और लोगों से सीधे संवाद भी किया।
आपदा से कितना हुआ नुकसान?
गंगोत्री यात्रा मार्ग पर कई स्थानों पर सड़कें और पुल वाशआउट हो गए, जिससे आम जनजीवन और पर्यटन दोनों ही बुरी तरह प्रभावित हुए। धराली और हर्षिल क्षेत्र में तेलगाड़ और खीर गंगा से लगी बाढ़ और मलबे ने गांवों को नुकसान पहुंचाया।
- कई मकान और होटल क्षतिग्रस्त हुए।
- बगीचे और खेत बर्बाद हो गए।
- स्थानीय व्यवसाय पूरी तरह ठप पड़ गए।
- बिजली और पानी की सप्लाई लाइनें भी टूट गईं।
ग्रामीणों ने टीम के सामने अपना दर्द बांटते हुए कहा कि आजीविका का बड़ा हिस्सा सेब के बगीचों और पर्यटन पर निर्भर है, लेकिन आपदा ने इन दोनों को गहरी चोट दी है।
ग्रामीणों की आवाज़ – “तेज़ी लाओ राहत कार्यों में”
गांव वालों ने साफ कहा कि अब तक उन्हें पर्याप्त मदद नहीं मिल पाई है। उन्होंने सरकार से मांग की:
- मुआवज़े की प्रक्रिया तेज की जाए।
- पुनर्वास योजनाओं को तुरंत लागू किया जाए।
- प्रभावित परिवारों को रोजगार और आर्थिक सहायता दी जाए।
उनका कहना था कि जब तक सीधी मदद नहीं पहुंचेगी, तब तक लोग सामान्य जीवन की ओर नहीं लौट पाएंगे।
प्रशासन की मौजूदगी और निरीक्षण
इस दौरे में एडीएम मुक्ता मिश्र, एसडीएम भटवाड़ी शालिनी नेगी, सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता संजय राज, जिला शिक्षा अधिकारी शैलेन्द्र अमोली, एसीएमओ बी.एस. पांगती, डीटीडीओ के.के. जोशी, और यूपीसीएल के अधिशासी अभियंता मनोज गुसाईं समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।
टीम ने न केवल प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया बल्कि अधिकारियों और ग्रामीणों से भी आपदा से हुए कुल नुकसान का आकलन लिया। कृषि, पशुपालन, पर्यटन और बुनियादी ढांचे के नुक़सान को विस्तार से दर्ज किया गया।
निष्कर्ष
धराली और आसपास के क्षेत्रों की यह आपदा केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं बल्कि मानव संघर्ष की कहानी है। लोग आज भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार और प्रशासन उनकी मदद करेगा।
279 परिवारों की भर्ती या विकास योजनाएँ अपनी जगह हैं, लेकिन जब तक आपदा प्रभावित परिवारों को सीधी राहत नहीं मिलेगी, तब तक पहाड़ के गांवों की पीड़ा कम नहीं होगी।
धराली के लोग सिर्फ मुआवज़ा नहीं मांग रहे, वे फिर से सामान्य जीवन जीने का हक मांग रहे हैं। यह हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि उनकी आवाज़ प्रशासन तक पहुंचे और सही मायनों में “आपदा से पुनर्निर्माण” का सपना साकार हो।