उत्तराखंड सरकार ने राज्यभर में नए सर्किल रेट लागू कर दिए हैं, जिससे अब प्रदेश में जमीन खरीदना पहले से काफी महंगा हो गया है। यह बदलाव पूरे राज्य में प्रभावी हो गया है, और नए रेट लागू होने से जमीनों के दामों में 15% से 22% तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
दो साल बाद हुआ सर्किल रेट में बड़ा संशोधन
यह संशोधन लगभग दो साल बाद किया गया है। इससे पहले वर्ष 2023 में सर्किल रेट बदले गए थे। राज्य सरकार ने इस बार भी संशोधन के लिए उसी फार्मूले को आधार बनाया है जो 2023 में अपनाया गया था।
सूत्रों के अनुसार, इस बार तेजी से विकसित होते इलाकों, जहां नई सड़कें, संस्थान या आवासीय प्रोजेक्ट बन रहे हैं, वहां सर्किल रेट में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी की गई है। वहीं पहले से संतृप्त या स्थिर क्षेत्रों में दरों को यथावत रखा गया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सोमवार को सर्किल रेट का विस्तृत ब्यौरा सभी जिलों में सार्वजनिक कर दिया जाएगा।
सर्किल रेट क्या होता है और क्यों जरूरी है बदलाव?
सर्किल रेट किसी भी जमीन या संपत्ति की सरकारी न्यूनतम दर होती है, जिस पर स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस तय की जाती है।
सरकार द्वारा तय की गई यह दर वास्तविक बाजार मूल्य से कम होती है, इसलिए समय-समय पर इसे बढ़ाना जरूरी होता है ताकि जमीन की असली कीमत और सरकारी दर के बीच का अंतर कम किया जा सके।
वास्तविक बाजार दर और सर्किल रेट के बीच बढ़ते अंतर से सरकार को राजस्व घाटा होता है और रियल एस्टेट बाजार में काले धन (black money) का प्रवाह बढ़ता है। यही कारण है कि सरकार ने इस बार दरों को यथार्थ के करीब लाने की कोशिश की है।
आपदा और पंचायत चुनावों ने रोका था संशोधन
दरअसल, सर्किल रेट संशोधन का प्रस्ताव जनवरी 2025 में ही तैयार हो गया था, लेकिन उस समय पंचायत चुनाव और उसके तुरंत बाद आई आपदाओं (भूस्खलन और भारी बारिश) की वजह से इसे लागू करने में देरी हुई।
अब जब हालात सामान्य हुए, तब जाकर सरकार ने इसे पूरे राज्य में लागू कर दिया है।
इस फैसले से सरकार को राजस्व बढ़ाने में मदद मिलेगी और प्रशासन को उम्मीद है कि इससे जमीन सौदों में पारदर्शिता भी आएगी।
किन क्षेत्रों में ज्यादा असर दिखेगा?
सर्किल रेट में बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर शहरी और तेजी से विकसित होते इलाकों में दिखेगा, जैसे —
- देहरादून (सहस्रधारा, रायपुर, प्रेमनगर, हर्रावाला)
- हरिद्वार (बहादराबाद, ज्वालापुर, रोशनाबाद)
- नैनीताल (हल्द्वानी, भीमताल)
- रुद्रपुर और काशीपुर (उधम सिंह नगर जिला)
इन क्षेत्रों में पहले से ही जमीन की मांग अधिक थी, और अब सर्किल रेट बढ़ने से कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
वहीं, पर्वतीय जिलों जैसे चमोली, बागेश्वर, टिहरी और पिथौरागढ़ में यह वृद्धि अपेक्षाकृत कम रखी गई है ताकि ग्रामीण और पहाड़ी जनसंख्या पर इसका नकारात्मक असर न पड़े।
लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
- आम खरीदारों पर प्रभाव: अब जमीन की रजिस्ट्री करवाना महंगा होगा क्योंकि स्टांप ड्यूटी नई दरों के हिसाब से लगेगी। अगर पहले किसी क्षेत्र में सर्किल रेट ₹10,000 प्रति वर्गमीटर था, और अब वह ₹12,000 हो गया है, तो खरीदार को सीधा 20% ज्यादा भुगतान करना होगा।
- बिल्डर्स और डेवलपर्स पर असर: प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ने से बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स की लागत भी बढ़ेगी। इससे नए घरों की कीमतें ऊपर जा सकती हैं, जो रियल एस्टेट बाजार की रफ्तार को थोड़े समय के लिए धीमा कर सकती है।
- सरकार को फायदा: बढ़े हुए सर्किल रेट से स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में सरकार को ज्यादा राजस्व (Revenue) मिलेगा। इस पैसे को राज्य विकास, सड़क निर्माण और सार्वजनिक सुविधाओं में निवेश किया जा सकता है।
उत्तराखंड की भूमि व्यवस्था और रियल एस्टेट की नई दिशा
उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति इसे निवेश के लिहाज से खास बनाती है। एक ओर देहरादून और हरिद्वार जैसे शहर तेजी से मेट्रो जैसी सुविधाओं की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में लोग खेती, होमस्टे और इको-टूरिज्म के लिए जमीन खरीद रहे हैं।
सर्किल रेट में यह बढ़ोतरी इन दोनों क्षेत्रों में अलग-अलग प्रभाव डालेगी।
जहां शहरी खरीदारों के लिए यह लागत बढ़ाएगा, वहीं सरकार के लिए यह राजस्व का नया स्रोत बनेगा।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में सर्किल रेट में बढ़ोतरी से जमीन खरीदना अब निश्चित रूप से महंगा हो गया है। यह निर्णय राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा और भूमि सौदों में पारदर्शिता बढ़ाएगा।
हालांकि, इसका असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ेगा। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि रियल एस्टेट बाजार इस नए बदलाव को कैसे अपनाता है।