हरिद्वार में मौसमी नदी को कचरा डंपिंग ज़ोन बनाने पर बवाल, गंगा और वन्यजीवों को खतरा

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हरिद्वार जिले के निवासियों ने एक मौसमी नदी की तलहटी में घरेलू और औद्योगिक कचरे के डंपिंग को लेकर गंभीर चिंता जताई है, जो मानसून के दौरान गंगा नदी में मिलती है। उनका कहना है कि शिवालिक नगर पालिका इस क्षेत्र को अनौपचारिक डंपिंग ग्राउंड के रूप में इस्तेमाल कर रही है, जिससे न केवल गंगा प्रदूषित हो रही है, बल्कि राजाजी टाइगर रिजर्व के पास होने से वन्यजीवों के लिए भी खतरा पैदा हो रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि मानसून में यह मौसमी धारा तेज बहाव के साथ सारा कचरा सीधे गंगा में ले जाती है, जिससे प्रदूषण और फैलता है। साथ ही यह भी कहा गया कि गायों को अक्सर प्लास्टिक खाते देखा गया है, जो चिंता का विषय है।

शिवालिक नगर नगर पालिका समिति के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 10 से 12 मीट्रिक टन कचरा क्षेत्र से उत्पन्न होता है, जिसमें SIDCUL औद्योगिक क्षेत्र और BHEL रिहायशी क्षेत्र से आने वाला कचरा भी शामिल है। नगरपालिका ने यह स्वीकार किया है कि डंपिंग साइट मौसमी नदी के किनारे है, लेकिन उन्होंने सीधे नदी में कचरा डालने से इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि डंपिंग साइट को स्थानांतरित करने का प्रस्ताव पहले ही सौंपा जा चुका है और पुराने कचरे का निपटान भी जल्द किया जाएगा।

यह मुद्दा न केवल पर्यावरणीय चिंता को उजागर करता है, बल्कि एक पवित्र नदी और संवेदनशील जैव विविधता क्षेत्र की रक्षा की आवश्यकता को भी दर्शाता है। स्थानीय निवासियों की मांग है कि इस प्रथा को तुरंत रोका जाए और कचरा प्रबंधन की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

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