भारतीय राजनीति इस समय एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। देश की सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), जो केंद्र की सत्ता में है और लगातार चुनावी जीत दर्ज करती रही है, वह अपने ही राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तय समय पर क्यों नहीं कर पा रही – यह बड़ा सवाल बन गया है।
अभी पार्टी की कमान किसके पास है?
फिलहाल भाजपा की कमान केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के हाथों में है। उन्हें पहले ही कार्यकाल विस्तार दिया जा चुका है। लेकिन पार्टी की ओर से अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि नया अध्यक्ष कब चुना जाएगा। राजनीतिक हलकों में कयास लगाए जा रहे हैं कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा नया अध्यक्ष घोषित कर सकती है।
विपक्ष के निशाने पर भाजपा
विपक्षी गठबंधन INDIA के नेताओं ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है।
- शिवसेना (UBT) के संजय राउत ने कहा – “एक पार्टी जो देश चला रही है, वह अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन तक नहीं कर पा रही। यह कैसा मामला है? आप चुनाव आयोग बदल सकते हैं, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बदल सकते हैं, यहां तक कि उपराष्ट्रपति को भी घर भेज सकते हैं। लेकिन अपनी पार्टी का अध्यक्ष तय नहीं कर सकते।”
- राउत ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा में किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है।
उनके इस बयान के बाद यह बहस और तेज हो गई कि आखिर भाजपा क्यों इतना समय ले रही है।
संभावित नाम – कौन हैं रेस में?
भाजपा ने अब तक किसी भी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं जोरों पर हैं।
- शिवराज सिंह चौहान – लंबे कार्यकाल के मुख्यमंत्री और संगठन में मजबूत पकड़।
- मनोहर लाल खट्टर – हरियाणा में काम करने का अनुभव और प्रधानमंत्री मोदी के करीबी माने जाते हैं।
- भूपेंद्र यादव – संगठनात्मक कौशल और रणनीतिकार की छवि।
- धर्मेंद्र प्रधान – केंद्र सरकार में अहम मंत्री, शिक्षा और उद्योग क्षेत्र में सक्रिय।
- देवेंद्र फडणवीस – महाराष्ट्र की राजनीति के बड़े चेहरे और युवा नेतृत्व का प्रतीक।
हालांकि इनमें से किसका नाम आगे आएगा, यह पार्टी का अंदरूनी मामला है, और फिलहाल सिर्फ अटकलें ही चल रही हैं।
निष्कर्ष
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन सिर्फ एक संगठनात्मक औपचारिकता नहीं, बल्कि पार्टी की भविष्य की रणनीति और चुनावी दिशा तय करने वाला कदम है। विपक्ष ने इस देरी पर सवाल उठाकर माहौल गरमा दिया है, लेकिन भाजपा जैसी अनुशासित पार्टी बिना गहरी सोच के ऐसे निर्णय में देर नहीं करती। बिहार चुनाव नजदीक हैं और संभव है कि पार्टी नया अध्यक्ष उसी वक्त पेश करे ताकि संदेश भी जाए और संगठन में नई ऊर्जा भी आए।