उत्तराखंड सरकार ने नशे की बढ़ती समस्या पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्यभर के स्कूलों में एंटी ड्रग मेडिकल टेस्ट अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में हर छात्र का मेडिकल टेस्ट कराया जाएगा। इसके साथ ही एंटी ड्रग कमेटी और गोपनीय छात्र समितियां भी बनाई जाएंगी ताकि स्कूल स्तर पर ही नशे के मामलों की पहचान और रोकथाम हो सके।
यह निर्णय राज्य सरकार की उस बड़ी पहल का हिस्सा है जिसका उद्देश्य युवा पीढ़ी को नशे के जाल से बचाना और समाज में जागरूकता फैलाना है।
शिक्षा विभाग ने तैयार किया पूरा खाका
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती के अनुसार, शिक्षा विभाग ने इस अभियान का पूरा खाका तैयार कर लिया है और सभी स्कूलों को कार्ययोजना भेज दी गई है। अभियान एक महीने तक चलेगा, जिसमें स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रत्येक स्कूल जाकर छात्रों की जांच करेंगी।
इस अभियान को “एंटी ड्रग मेडिकल जांच” नाम दिया गया है, जिसके तहत विद्यार्थियों की मेडिकल स्क्रीनिंग होगी ताकि शुरुआती स्तर पर ही नशे की पहचान की जा सके और समय रहते उन्हें सही दिशा में लाया जा सके।
हर स्कूल में बनेगी एंटी ड्रग कमेटी
राज्य के सभी स्कूलों में अब एंटी ड्रग कमेटी बनाना अनिवार्य होगा। इस कमेटी का काम होगा—
- नशे से जुड़े मामलों की निगरानी करना
- छात्रों से संवाद कर उनकी मानसिक स्थिति को समझना
- नशे की शिकायतों को गोपनीय रूप से दर्ज करना
- और स्कूल स्तर पर आवश्यक कदम उठाना
इसके अलावा, कमेटी विद्यार्थियों के बीच नशा मुक्ति पर कार्यशालाएं, जागरूकता रैलियां और काउंसलिंग सत्र भी आयोजित करेगी।
गोपनीय छात्र समिति भी रखेगी नजर
इस अभियान की एक खास बात यह है कि हर स्कूल में छात्रों की एक गोपनीय समिति (Confidential Student Committee) भी बनाई जाएगी। यह समिति विद्यार्थियों के बीच रहकर नशे से जुड़े मामलों पर नजर रखेगी और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना एंटी ड्रग कमेटी तक पहुंचाएगी।
इस तरह की व्यवस्था पहले किसी राज्य में बड़े स्तर पर नहीं अपनाई गई थी। यह पहल न केवल प्रशासनिक रूप से प्रभावी है, बल्कि विद्यार्थियों के बीच आत्म-जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना भी पैदा करेगी।
नशा विरोधी शिक्षा होगी पाठ्यक्रम का हिस्सा
शिक्षा विभाग अब नशा मुक्ति को लेकर एक नया पाठ्यक्रम भी तैयार कर रहा है। इसे सभी स्कूलों में अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाएगा। इस पाठ्यक्रम में नशे के दुष्प्रभाव, सामाजिक प्रभाव, और जीवन पर इसके खतरे से संबंधित विषय शामिल होंगे।
इससे बच्चों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नशा केवल एक लत नहीं, बल्कि भविष्य को बर्बाद करने वाली सामाजिक बीमारी है।
मुख्य सचिव का निर्देश और अभियान की निगरानी
मुख्य सचिव ने शिक्षा विभाग को नशे के खिलाफ वृहद कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए थे। अब इस योजना को लागू करते हुए विभाग ने हर तिमाही समीक्षा की व्यवस्था की है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अभियान केवल दिखावे तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक परिणाम भी दे।
नशे की समस्या – पहाड़ों में बढ़ती नई चुनौती
हाल के वर्षों में उत्तराखंड जैसे शांत और शिक्षित राज्य में भी नशे की समस्या तेजी से बढ़ी है। देहरादून, हल्द्वानी, हरिद्वार और नैनीताल जैसे शहरों में युवाओं के बीच नशे की लत के कई मामले सामने आए हैं।
पहाड़ी इलाकों में रोजगार की कमी, बाहरी संस्कृति का प्रभाव और सामाजिक दबाव के चलते युवा नशे की ओर खिंच रहे हैं। ऐसे में यह अभियान समय की मांग था।
निष्कर्ष
उत्तराखंड सरकार का यह निर्णय देशभर के लिए एक मिसाल बन सकता है। एंटी ड्रग मेडिकल टेस्ट, गोपनीय समितियों और पाठ्यक्रम के जरिए बच्चों को सुरक्षित रखने की यह पहल सराहनीय है।
यदि यह योजना सही ढंग से लागू हुई तो यह न केवल राज्य के लाखों छात्रों को नशे से बचाएगी, बल्कि पूरे देश में नशा मुक्ति की दिशा में एक नई सोच और जागरूक समाज की शुरुआत करेगी।