उत्तराखंड में हाल ही में हुई समीक्षा अधिकारी (RO) और सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO) भर्ती परीक्षा अब विवादों के घेरे में है। इस भर्ती परिणाम में कथित गड़बड़ी के खिलाफ दायर याचिका पर आज नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई होने जा रही है। मामला सिर्फ उम्मीदवारों की उम्मीदों का नहीं, बल्कि पूरे आयोग की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
28 मार्च 2025 को उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी भर्ती परीक्षा का परिणाम घोषित किया। इस परिणाम में कई उम्मीदवार सफल घोषित किए गए।
लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि मात्र एक हफ्ते बाद, 4 अप्रैल को आयोग ने अचानक पूरा परिणाम निरस्त कर दिया। कारण बताया गया – तकनीकी त्रुटि।
इसके बाद 12 अप्रैल को नया परिणाम जारी किया गया, जिसमें छह उम्मीदवारों के नाम सूची से हटा दिए गए और उनकी जगह छह नए नाम शामिल कर दिए गए। यही फैसला विवाद की जड़ बना और प्रभावित उम्मीदवार सीधे हाईकोर्ट पहुंच गए।
अदालत में क्या चल रहा है?
याचिकाकर्ता अशोक कुमार तोमर और अन्य उम्मीदवारों ने तर्क दिया कि यह फैसला आयोग की पारदर्शिता पर गहरे सवाल खड़ा करता है। जब एक बार परिणाम घोषित हो चुका था, तो फिर अचानक उसे बदलने की क्या जरूरत थी? क्या यह किसी दबाव या आंतरिक मिलीभगत का परिणाम था?
हाईकोर्ट ने भी इस मामले को गंभीर माना और पिछली सुनवाई में कहा कि चयन प्रक्रिया की साख और निष्पक्षता को लेकर गंभीर प्रश्न उठ खड़े हुए हैं। अब 9 सितंबर को फिर से सुनवाई हो रही है और उम्मीदवारों को उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा।
युवाओं की नाराज़गी और भरोसे का संकट
उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों को लेकर पहले से ही युवाओं में असंतोष है। पिछले कुछ सालों में भर्ती घोटाले, पेपर लीक और चयन प्रक्रिया में खामियों ने बेरोजगार युवाओं के भरोसे को गहरी चोट पहुंचाई है।
इस भर्ती विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वाकई आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाएं भी पूरी तरह पारदर्शी हैं?
खासकर उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां युवा बड़ी उम्मीदों के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लेते हैं, ऐसे विवाद उनके मनोबल को तोड़ देते हैं।
स्थानीय और व्यापक असर
- नैनीताल हाईकोर्ट की इस सुनवाई पर पूरे राज्य के युवाओं की निगाहें टिकी हुई हैं।
- यदि अदालत आयोग को जवाबदेह ठहराती है, तो यह भविष्य की सभी भर्तियों के लिए बड़ा उदाहरण बनेगा।
- वहीं, अगर मामले को हल्के में लिया गया, तो युवाओं का विश्वास पूरी तरह डगमगा सकता है और सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन की संभावना भी बढ़ सकती है।
निष्कर्ष
समीक्षा अधिकारी भर्ती विवाद केवल एक भर्ती परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी की समस्या और भर्ती संस्थाओं की पारदर्शिता से जुड़ा बड़ा सवाल है। अब देखना यह होगा कि हाईकोर्ट आज की सुनवाई में क्या रुख अपनाता है और क्या उम्मीदवारों को न्याय मिलेगा।