उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) पेपर लीक कांड युवाओं के गुस्से का कारण बना हुआ है। नौकरी की उम्मीद में दिन-रात मेहनत करने वाले हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य इस धांधली से प्रभावित हुआ। हल्द्वानी, देहरादून और अन्य शहरों में युवा लगातार आंदोलन कर रहे थे। इसी बीच सोमवार को घटनाक्रम ने तब नया मोड़ लिया, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद धरना स्थल पर पहुंच गए और महज 15 मिनट की बातचीत में आंदोलन को स्थगित करवा लिया।
अचानक पहुंचे मुख्यमंत्री, युवाओं को हुआ आश्चर्य
सोमवार दोपहर करीब सवा तीन बजे, सीएम धामी राजपुर विधायक खजानदास के साथ देहरादून परेड ग्राउंड के पास आंदोलन कर रहे बेरोजगार युवाओं के बीच पहुंचे। सीएम का काफिला आते देख एक पल को सभी छात्र हतप्रभ रह गए, क्योंकि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि सरकार का मुखिया बिना पूर्व सूचना के सीधे धरना स्थल पर पहुंच जाएगा।
लेकिन धामी ने किसी औपचारिक भाषण या राजनीतिक अंदाज की जगह सीधे युवाओं के बीच बैठकर उनकी बातें सुनीं। एक-एक कर छात्रों ने अपनी प्रमुख मांगें रखीं और सीएम ने मौके पर ही उनका जवाब दिया।
15 मिनट में कैसे बने सहमति के हालात?
युवाओं ने सबसे पहले सीबीआई जांच की मांग रखी। इस पर मुख्यमंत्री ने तुरंत हामी भरी और मौके पर ही फाइल पर साइन कर दिए।
- मुकदमे वापसी की मांग पर भी उन्होंने आश्वासन दिया कि शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल युवाओं के खिलाफ दर्ज मामलों पर पुनर्विचार किया जाएगा।
- परीक्षा निरस्त करने की मांग पर उन्होंने साफ कहा कि यह निर्णय UKSSSC स्तर पर होगा, लेकिन सरकार निष्पक्षता सुनिश्चित करेगी।
युवाओं को यह देखकर राहत मिली कि उनकी बातों को न केवल सुना गया बल्कि मौके पर कार्रवाई का आश्वासन भी मिला। नतीजतन, आठ दिन से चल रहा आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया गया।
विपक्ष की घेराबंदी को तोड़ने की रणनीति
पेपर लीक प्रकरण के चलते धामी सरकार विपक्ष के निशाने पर थी। कांग्रेस और अन्य दल लगातार सीबीआई जांच की मांग उठाकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे थे। ऐसे में सीएम का खुद धरना स्थल पर जाना और मांगों को तुरंत स्वीकार करना, एक तरह से विपक्ष के दबाव को निष्फल करने की रणनीति भी साबित हुआ।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धामी पहले भी कई मौकों पर जनता से जुड़े मुद्दों पर तेज और अप्रत्याशित फैसले लेकर विपक्ष को चौंका चुके हैं। यह कदम भी उसी सिलसिले का हिस्सा है।
आंदोलनरत युवाओं की भावनाएं और उम्मीदें
धरने में शामिल छात्रों ने माना कि सीएम का खुद आकर उनसे मिलना बड़ी बात है। उन्हें लगा कि आखिरकार उनकी आवाज सरकार तक सही तरीके से पहुंची। हालांकि कई युवाओं ने यह भी कहा कि अब वे सरकार के आश्वासन को समयबद्ध कार्रवाई से परखेंगे।
छात्रा ममता ने कहा – “हम महीनों से उम्मीद खो चुके थे, लेकिन आज लगा कि शायद अब हमारी मेहनत और संघर्ष बेकार नहीं जाएगा।”
व्यक्तिगत दृष्टिकोण: यह संवाद सकारात्मक कदम
मेरी नजर में, किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की खूबसूरती यही है कि सरकार और जनता के बीच संवाद हो। धामी का धरना स्थल पर जाना केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं, बल्कि युवाओं के भरोसे को वापस पाने का प्रयास था।
लेकिन इस तरह के प्रकरण केवल आश्वासन से खत्म नहीं होते। जरूरत है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वास की गारंटी दी जाए। अगर सरकार वाकई कड़े कदम उठाती है तो यह भविष्य में ऐसे आंदोलनों को रोकने में मदद करेगा।
निष्कर्ष
UKSSSC पेपर लीक कांड ने हजारों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा दिया। आठ दिन से लगातार आवाज उठा रहे बेरोजगारों को मुख्यमंत्री धामी ने सिर्फ 15 मिनट में मना लिया, यह उनकी राजनीतिक सूझबूझ और त्वरित निर्णय क्षमता को दर्शाता है। लेकिन अब असली चुनौती आश्वासन को हकीकत में बदलने की है।
अगर सरकार ने पारदर्शी जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की, तो यह न केवल युवाओं का विश्वास बहाल करेगी बल्कि उत्तराखंड की भर्ती व्यवस्था को भी नई दिशा देगी।