उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की परीक्षा में हुए पेपर लीक प्रकरण ने प्रदेश की राजनीति और समाज दोनों को झकझोर कर रख दिया है। यह मामला सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं के भविष्य, रोजगार की पारदर्शिता और सरकार पर जनता के विश्वास का बड़ा सवाल बन चुका है।
भाजपा नेता का इस्तीफ़ा
इसी बीच इस मुद्दे ने राजनीतिक भूचाल भी ला दिया। उत्तरकाशी के भाजपा नेता अभिषेक जगूड़ी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया और युवाओं के आंदोलन में शामिल हो गए।
अभिषेक जगूड़ी भाजपा के भागीरथी मंडल के महामंत्री रह चुके हैं। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और जिलाध्यक्ष नागेंद्र चौहान को पत्र लिखकर कहा कि “देश और प्रदेश में भाजपा की सरकार होते हुए भी आम जनता और युवाओं की स्थिति दयनीय है।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी में वर्षों से मेहनत करने वाले पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है, जबकि भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों को सम्मानित पद दिए जा रहे हैं।
बेरोजगार युवाओं का गुस्सा
पेपर लीक से सबसे ज्यादा नुकसान बेरोजगार युवाओं का हुआ है, जो सालों की तैयारी के बाद परीक्षा देते हैं। जब उन्हें पता चलता है कि मेहनत के बजाय धांधली करने वाले ही सफल हो रहे हैं, तो उनका गुस्सा और हताशा स्वाभाविक है।
देहरादून के परेड ग्राउंड में सैकड़ों युवा लगातार धरने पर बैठे हैं। उनकी मुख्य मांग है कि इस मामले की सीबीआई जांच हो, ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सच्चाई सामने आ सके। लेकिन सरकार इस समय एसआईटी जांच पर भरोसा जता रही है।
उत्तराखंड की जमीनी सच्चाई
अगर हम ईमानदारी से देखें तो पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल युवाओं की मेहनत पर पानी नहीं फेरतीं, बल्कि पूरे राज्य की छवि खराब करती हैं। उत्तराखंड जैसे छोटे और संसाधनों की कमी वाले राज्य में रोजगार पहले से ही बड़ी चुनौती है। यहां के पहाड़ी इलाकों के युवा अक्सर शिक्षा और रोजगार के लिए मैदान या महानगरों की ओर पलायन करते हैं।
ऐसे में अगर सरकारी परीक्षाओं पर भी भरोसा उठ जाए, तो यह राज्य के लिए बहुत गंभीर स्थिति है।
राजनीति बनाम जनता का भरोसा
पेपर लीक प्रकरण में अब राजनीति भी खुलकर सामने आ गई है। विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है, और अब तो सत्तारूढ़ पार्टी के नेता भी इस्तीफ़ा देकर बेरोजगार युवाओं के साथ खड़े हो रहे हैं।
यह स्थिति सरकार के लिए चेतावनी है कि अगर उसने युवाओं की आवाज़ नहीं सुनी, तो भविष्य में इसका राजनीतिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।
निष्कर्ष
UKSSSC पेपर लीक कांड अब केवल परीक्षा का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह बेरोजगार युवाओं की उम्मीदों, पारदर्शिता और सरकार पर भरोसे की परीक्षा बन चुका है।
अभिषेक जगूड़ी जैसे नेताओं का इस्तीफ़ा इस बात का संकेत है कि यह मामला गहराई से राजनीतिक और सामाजिक असर डाल रहा है।
अब सवाल यह है कि क्या सरकार बेरोजगार युवाओं की आवाज़ सुनेगी और इस मामले में कड़ी कार्रवाई करेगी, या फिर यह प्रकरण भी समय के साथ दब जाएगा।