पिथौरागढ़ हादसा: 150 मीटर गहरी खाई में गिरी मैक्स गाड़ी, 8 लोगों की दर्दनाक मौत, 3 घायल; पीएम मोदी और सीएम धामी ने जताया शोक
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले के मुवानी क्षेत्र में मंगलवार को एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ, जिसमें एक मैक्स वाहन के खाई में गिर जाने से आठ लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
जानकारी के अनुसार, वाहन में कुल 13 लोग सवार थे और वह मुवानी से बोकटा की ओर जा रहा था। बताया जा रहा है कि एक खतरनाक मोड़ पर वाहन चालक का नियंत्रण बिगड़ गया, जिससे गाड़ी सीधे लगभग 150 मीटर गहरी खाई में जा गिरी।
घटना के बाद ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर घायलों को बचाने की कोशिश की। थोड़ी देर में प्रशासनिक अधिकारी और रेस्क्यू टीमें भी घटनास्थल पर पहुंचीं। घायलों को गंभीर हालत में इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि वे इस त्रासदी से व्यथित हैं। उन्होंने मृतकों के परिजनों के लिए ₹2 लाख और घायलों के लिए ₹50,000 की आर्थिक मदद की घोषणा की है, जो प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से दी जाएगी।
पीएमओ द्वारा जारी बयान में कहा गया:
“पिथौरागढ़ में हुई सड़क दुर्घटना बेहद दुखद है। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी संवेदना है। मैं प्रार्थना करता हूं कि घायल जल्द स्वस्थ हों।”
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस घटना को लेकर शोक प्रकट किया और सोशल मीडिया पर लिखा:
“पिथौरागढ़ जिले के मुवानी क्षेत्र में वाहन दुर्घटना की सूचना अत्यंत पीड़ादायक है। दिवंगतों की आत्मा को शांति मिले और ईश्वर उनके परिजनों को यह दुःख सहने की शक्ति दे। घायल यात्रियों के इलाज के लिए ज़िला प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं।”
प्रशासन के प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, सड़क की खराब स्थिति और अत्यधिक गति इस दुर्घटना का कारण हो सकती है। हालांकि, वास्तविक वजह का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।
राहत एवं बचाव कार्यों के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि दुर्घटना इतनी भयावह थी कि वाहन के पुर्जे बुरी तरह बिखर गए थे। मृतकों की पहचान में समय लगा। ज़िला प्रशासन के अनुसार, सभी यात्री आस-पास के गांवों के रहने वाले थे और अपने घर लौट रहे थे।
इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में ट्रैफिक सुरक्षा और सड़क की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग लंबे समय से खराब सड़कों और अपर्याप्त सुरक्षा उपायों की शिकायत करते आ रहे हैं, लेकिन अब ज़रूरत है ठोस कार्रवाई की — ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियाँ रोकी जा सकें।