Challenge Forest Department: जंगल माफिया ने हरे पेड़ काट ठूंठ पर लिखा ‘ये ट्रेलर है, वन विभाग को दी खुली चुनौती

Uttarakhand Magazine Team
Uttarakhand Magazine Team
The Uttarakhand Magazine team is a dedicated group of writers, journalists, and digital storytellers united by a shared passion for the land of the Himalayas. Based...
4 Min Read

उत्तराखंड का हरा-भरा जंगल एक बार फिर लकड़ी माफियाओं के निशाने पर आ गया है। पीपल पड़ाव रेंज में बीते बुधवार रात जो घटना हुई, उसने न सिर्फ वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखा दिया कि जंगल माफिया किस हद तक बेखौफ हैं।

रात के अंधेरे में माफियाओं ने 14 विशाल सागौन के हरे पेड़ काट डाले। इन पेड़ों की गोलाई 4 से 6 फीट तक बताई जा रही है, यानी यह कोई छोटे पौधे नहीं, बल्कि दशकों पुराने पेड़ थे। जब वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो आरोपियों ने उन पर हवाई फायरिंग की और मौके से फरार हो गए। जाते-जाते उन्होंने कटे हुए पेड़ों के ठूंठ पर बड़ी ही चुनौतीपूर्ण भाषा में लिखा—
“ये तो ट्रेलर है।”

वन विभाग को सीधी धमकी

यह घटना पीपल पड़ाव रेंज ऑफिस से महज 1.5 किलोमीटर की दूरी पर हुई। यानी माफियाओं ने न सिर्फ जंगल, बल्कि वन विभाग के नाक के नीचे यह करतूत की। और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पेड़ों के ठूंठ पर वन बीट वॉचर अनिल का नाम लिखकर सीधी धमकी भी दी गई—
“अनिल भाई, अगली बार पचास।”

इससे साफ है कि यह घटना सिर्फ पेड़ काटने तक सीमित नहीं, बल्कि वन विभाग के लिए एक खुली चेतावनी है।

वन विभाग की कार्रवाई

आरओ पूरन चंद्र जोशी के अनुसार, यह घटना वन विभाग की ओर से लगातार की जा रही सख्ती के खिलाफ द्वेष भावना से की गई। फिलहाल तीन नामजद समेत 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ गदरपुर थाने में एफआईआर दर्ज कर दी गई है।

See also  उत्तराखंड में अब ध्वनि प्रदूषण पर सख्ती: नियम तोड़ा तो लगेगा 10 हजार रुपये तक जुर्माना, हो सकती है जेल भी

लेकिन सवाल यह है कि क्या एफआईआर और कागजी कार्रवाई भर से इन माफियाओं का हौसला टूटेगा?

लकड़ी तस्करी की पुरानी घटनाएं

यह पहली बार नहीं है जब पीपल पड़ाव रेंज में पेड़ कटने की खबर आई हो। पिछले एक साल में ही कई बड़ी घटनाएं सामने आई हैं:

  • 7 सितंबर 2024: सागौन के 10 लट्ठे बरामद।
  • 10 सितंबर 2024: 49 खैर के गिल्टे जब्त।
  • 16 मई 2025: हरिपुरा जलाशय से शीशम और सागौन के गिल्टे बरामद।
  • 24 मई 2025: हरिपुरा जलाशय के पास खैर के 70 गिल्टे बरामद।
  • 29 मई 2025: नाव से लाई जा रही खैर की लकड़ी के 15 गिल्टे पकड़े गए।

इतनी घटनाओं के बावजूद माफियाओं का खुलेआम चुनौती देना बताता है कि उनकी पकड़ कितनी मजबूत है।

निष्कर्ष

पीपल पड़ाव रेंज की घटना सिर्फ पेड़ों की कटाई नहीं, बल्कि उत्तराखंड के पर्यावरण और वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल है। “ये तो ट्रेलर है” लिखकर माफियाओं ने साफ कर दिया है कि वे किसी से डरते नहीं। अब यह जिम्मेदारी सरकार, प्रशासन और हम सबकी है कि इस चुनौती का जवाब मिलकर दिया जाए।

अगर हम आज इन जंगलों को नहीं बचा पाए, तो कल यह सिर्फ खबरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हमारी सांसों तक पर असर डालेगा।

Share This Article
The Uttarakhand Magazine team is a dedicated group of writers, journalists, and digital storytellers united by a shared passion for the land of the Himalayas. Based in Uttarakhand, the team covers everything that defines the spirit of the state — from its rich culture, traditions, and tourism to its people, environment, and development stories.
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

A 5-Day Journey to Kedarnath: From Faith to the Heart of the Himalayas “Why Uttarakhand Should Be Your Next Travel Destination” Panch Prayag Panch Badri History of Gangotri Temple