“छोटे कारण, बड़ा असर” – एक मामूली छिपकली ने दिखा दी बिजली व्यवस्था की असली हालतहल्द्वानी में गुरुवार की सुबह कुछ यूं गुजरी मानो शहर अचानक किसी ‘ब्लैकआउट जोन’ में चला गया हो। कारण न कोई तूफान, न कोई तकनीकी अपग्रेडेशन — बल्कि एक छिपकली। जी हां, कठघरिया बिजलीघर के पैनल में घुसी एक छिपकली ने तकनीकी ब्लास्ट कर दिया और देखते ही देखते करीब 17 हजार घरों की बिजली तीन घंटे के लिए गुल हो गई।सुबह के समय जब लोग घरों में चाय बनाने, बच्चों को स्कूल भेजने या दफ्तर के लिए तैयार होने में व्यस्त थे, तभी पूरा इलाका अचानक अंधेरे में डूब गया। बिजली नहीं होने से न सिर्फ घरों में परेशानी हुई बल्कि कई इलाकों में पानी की सप्लाई भी रुक गई क्योंकि ट्यूबवेल चल नहीं सके।
कैसे हुई पूरी घटना
गुरुवार सुबह करीब 6 बजे, कठघरिया बिजलीघर के पैनल में एक छिपकली घुस गई। जैसे ही वह हाई-वोल्टेज तारों के संपर्क में आई, पैनल में ब्लास्ट हो गया। इससे बिजलीघर की एक मुख्य लाइन ठप हो गई और बिजली आपूर्ति रुक गई।
ऊर्जा निगम के कर्मचारियों ने तुरंत साइट पर पहुंचकर मरम्मत कार्य शुरू किया, लेकिन पैनल की स्थिति गंभीर थी। सिस्टम को दोबारा चालू करने में करीब तीन घंटे का समय लग गया।
उपखंड अधिकारी बी.बी. जोशी ने बताया कि “तकनीकी खराबी को दुरुस्त करने के बाद आपूर्ति बहाल कर दी गई है। यह एक आकस्मिक घटना थी, लेकिन अब सिस्टम को पूरी तरह से सुरक्षित कर लिया गया है।”
17 हजार घरों के साथ पेयजल सप्लाई भी ठप
इस बिजलीघर से टीपीनगर, कमलुवागाजा, धौलाखेड़ा और आसपास के कई इलाके जुड़े हैं। इसलिए जब सप्लाई बंद हुई तो इन क्षेत्रों में पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो गई।
हल्द्वानी जैसे तेजी से बढ़ते शहर में सुबह के समय बिजली कटौती का मतलब है — पूरा शेड्यूल बिगड़ जाना। लोगों को न सिर्फ काम में बल्कि बच्चों की पढ़ाई और ऑनलाइन क्लासेस तक में दिक्कत हुई।
दीवाली से पहले बिजली विभाग पर सवाल
दिलचस्प बात यह है कि यह घटना उस समय हुई जब ऊर्जा निगम दीवाली से पहले लाइन मेंटेनेंस और अपग्रेडेशन कार्यों में व्यस्त है। गुरुवार को ही मेंटेनेंस के लिए टीपीनगर, कठघरिया, कमलुवागाजा और धौलाखेड़ा बिजलीघरों से सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक सप्लाई बंद रखी गई थी।
लेकिन इससे पहले ही एक छिपकली के कारण हुई इस तकनीकी खराबी ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या हमारी बिजली व्यवस्था इतनी नाजुक है कि एक छोटे जीव के कारण पूरा सिस्टम ठप हो जाए?
तकनीकी व्यवस्था या लापरवाही का नतीजा?
इस घटना ने यह भी उजागर किया कि बिजलीघर के अंदर सेफ्टी प्रोटोकॉल और वायरिंग सिस्टम कितने सुरक्षित हैं। बिजली विभाग के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, पैनल में छिपकलियों या छोटे जीवों का घुसना कोई नई बात नहीं है।
दरअसल, कई बिजलीघरों में प्रॉपर इंसुलेशन, सीलिंग और वेदर प्रोटेक्शन की कमी है। इसका मतलब है कि छोटे जानवर जैसे छिपकली, मेंढक या चूहे आसानी से अंदर पहुंच जाते हैं और संवेदनशील सर्किट को शॉर्ट कर देते हैं।
अगर यह पैनल पूरी तरह स्वचालित था, तो इसमें ऐसी दुर्घटना को रोकने के लिए सेफ्टी ब्रेकर और प्रोटेक्टिव शील्ड मौजूद होनी चाहिए थी। लेकिन घटना बताती है कि ऐसे उपाय या तो लागू नहीं किए गए, या समय पर जांच नहीं हुई।
स्थानीय दृष्टिकोण – हल्द्वानी की बिजली व्यवस्था को चाहिए आधुनिकीकरण
हल्द्वानी तेजी से बढ़ता शहर है। यहां जनसंख्या और बिजली की मांग दोनों बढ़ रही हैं। ऐसे में पुराने ढांचे और पारंपरिक सिस्टम पर निर्भर रहना अब जोखिम भरा हो गया है।
कठघरिया और आसपास के कई बिजलीघर अब भी 80 के दशक की तकनीक पर आधारित हैं, जहां आधुनिक सेफ्टी कंट्रोल, आइसोलेशन पैनल और डिजिटल मॉनिटरिंग नहीं है।
ऐसी स्थिति में एक छोटी सी तकनीकी गड़बड़ी भी हजारों उपभोक्ताओं को प्रभावित कर सकती है।
निष्कर्ष
हल्द्वानी की यह घटना भले ही तीन घंटे की बिजली कटौती तक सीमित रही हो, लेकिन इसने कई अहम सवाल उठाए हैं।
क्या हमारी बिजली व्यवस्था इतनी संवेदनशील है कि एक छोटे जीव से ठप हो सकती है?
क्या विभाग नियमित निरीक्षण करता है?
और सबसे अहम — क्या इस तरह की घटनाओं से कोई सबक लिया जाएगा?
क्योंकि अगर जवाब नहीं मिला, तो अगली बार छिपकली नहीं, कोई और छोटी सी लापरवाही फिर पूरे शहर को अंधेरे में डुबो सकती है।