उत्तराखंड की धार्मिक नगरी हरिद्वार एक बार फिर तनावपूर्ण घटनाओं की वजह से सुर्खियों में है। यहां गाय की मौत के बाद उपजे विवाद ने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन को चुनौती दी, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है।
कैसे हुआ विवाद की शुरुआत?
घटना लक्सर-रायसी-बालावाली मार्ग पर स्थित कुड़ी भगवानपुर गांव के पास की है।
- बिजनौर की ओर जा रहे एक टेंपो, जिसमें मांस लदा हुआ था, ने सड़क पर भटक रही गाय को टक्कर मार दी।
- टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि गाय की मौके पर ही मौत हो गई।
- जैसे ही यह खबर फैली, स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौके पर इकट्ठा हो गए और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया।
गाय की मौत ने लोगों की धार्मिक भावनाओं को गहरी चोट पहुंचाई। यहां के ग्रामीण समाज में गाय को केवल पशु नहीं, बल्कि आस्था और परिवार का हिस्सा माना जाता है। यही कारण है कि भीड़ का गुस्सा जल्द ही हंगामे और विरोध प्रदर्शन में बदल गया।
भीड़ का गुस्सा और विधायक की मौजूदगी
सूचना मिलने पर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को काबू करने की कोशिश करने लगी। इसी बीच, निर्दलीय विधायक उमेश कुमार भी घटनास्थल पर पहुंचे।
लेकिन यहां विवाद और गहरा गया।
- आरोप है कि विधायक और उनके समर्थकों ने भीड़ को शांत करने के बजाय और अधिक उकसाया।
- भीड़ ने अचानक पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया, जिसमें दो पुलिसकर्मी – मोहित खंतवाल और किशोर नेगी – घायल हो गए।
- स्थिति इतनी बिगड़ गई कि आसपास के थानों से अतिरिक्त फोर्स बुलानी पड़ी।
- आखिरकार पुलिस को लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर करना पड़ा।
पुलिस की कार्रवाई
इस पूरे प्रकरण में पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है।
- टेंपो चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
- सड़क जाम और पथराव के आरोप में विधायक उमेश कुमार समेत 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है।
- इसके अलावा, भीड़ में शामिल 100 से 150 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।
मामले की जांच फिलहाल जारी है और पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना अचानक हुई भीड़ की प्रतिक्रिया थी या इसे राजनीतिक तौर पर भड़काया गया।
हरिद्वार की संवेदनशील पृष्ठभूमि
हरिद्वार धार्मिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील इलाका है। यहां सालभर बड़ी संख्या में तीर्थयात्री और श्रद्धालु आते हैं।
- गाय से जुड़ी घटनाएं यहां अक्सर आस्था और भावनाओं से जुड़ जाती हैं।
- पहले भी छोटे विवाद बड़े दंगे या तनाव का रूप ले चुके हैं।
- ऐसे में प्रशासन को हमेशा सतर्क रहना पड़ता है।
यह घटना साफ दिखाती है कि धार्मिक मुद्दों पर तनाव कितनी जल्दी कानून-व्यवस्था संकट में बदल सकता है।
निष्कर्ष
हरिद्वार की इस घटना ने फिर साबित कर दिया कि धार्मिक और सामाजिक मुद्दे कितनी जल्दी राजनीतिक रंग ले लेते हैं। फिलहाल पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में कर लिया है, लेकिन यह सवाल जरूर खड़ा हो गया है कि नेताओं की भूमिका आखिर समाज को जोड़ने की है या उसे और विभाजित करने की।