Dehradun: देहरादून के इस ‘हीरो’ ने उड़ाया था सबसे पहले मिग-21, फाइटर जेट की विदाई पर क्या बोले

Uttarakhand Magazine Team
Uttarakhand Magazine Team
The Uttarakhand Magazine team is a dedicated group of writers, journalists, and digital storytellers united by a shared passion for the land of the Himalayas. Based...
4 Min Read

भारतीय वायुसेना के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले लड़ाकू विमान मिग-21 को 62 साल बाद शुक्रवार को आधिकारिक विदाई दे दी गई। यह सिर्फ एक विमान की रिटायरमेंट नहीं, बल्कि भारतीय सैन्य इतिहास के एक महत्वपूर्ण युग का समापन है। इस मौके पर देहरादून निवासी और मिग-21 उड़ाने वाले पहले आठ भारतीय पायलटों में शामिल एयर मार्शल (रिटायर्ड) बृजेश धर जयाल भावुक हो उठे।

देहरादून से दुनिया की ऊंचाइयों तक

एयर मार्शल जयाल, जो मसूरी डायवर्जन रोड क्षेत्र में रहते हैं, 1960 के दशक में मिग-21 उड़ाने वाले भारतीय पायलटों के पहले बैच का हिस्सा थे। उस समय भारत ने सोवियत संघ से यह अत्याधुनिक विमान अपनी वायुसेना में शामिल किया था। जयाल और उनके साथियों को रूस भेजा गया, जहां उन्होंने पहली बार मिग-21 की उड़ान भरी।

उन आठ पायलटों में बृजेश जयाल के अलावा विंग कमांडर दिलबाग सिंह, स्क्वाड्रन लीडर एमएसडी वोल्लेन, एसके मेहरा, फ्लाइट लेफ्टिनेंट एके मुखर्जी, एचएस गिल, एके सेन और डी कीलोर शामिल थे।

जयाल ने बताया कि जब वे 27 वर्ष के थे, तब मिग-21 ने उन्हें सिर्फ उड़ान ही नहीं दी, बल्कि आत्मविश्वास और देश की सुरक्षा में योगदान का गर्व भी दिया।

छह दशक की गौरवशाली सेवा

मिग-21 का भारतीय वायुसेना में योगदान अतुलनीय है। इसे 1963 में शामिल किया गया था और इसके बाद इसने भारत के तीन बड़े युद्धों में अहम भूमिका निभाई। पाकिस्तान के खिलाफ 1965 और 1971 के युद्धों में, तथा कारगिल युद्ध में भी इस विमान ने अपनी ताकत साबित की।

See also  Supreme Court Approves JSW Steel: JSW Steel के पक्ष में आया ‘सुप्रीम’ फैसला, सबसे लम्बा इंसॉल्वेंसी केस खत्म, अधिग्रहण का रास्ता साफ

विदाई समारोह में वायुसेना प्रमुख ए.पी. सिंह ने खुद मिग-21 उड़ाकर इसे अंतिम सम्मान दिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इसे “राष्ट्रीय गौरव” की संज्ञा दी।

एक पायलट की भावनाएं

90 वर्ष की उम्र में भी एयर मार्शल जयाल की आंखों में उस समय की चमक साफ झलकती है। उन्होंने कहा—

“मिग-21 का रिटायर होना गौरव का क्षण है। यह सिर्फ एक विमान नहीं, बल्कि हमारी सुरक्षा और साहस की पहचान रहा है। इसके साथ बिताए पल हमेशा याद रहेंगे।”

उन्होंने यह भी कहा कि मिग-21 से उन्हें अनुशासन, साहस और तुरंत निर्णय लेने की क्षमता जैसे गुण सीखने को मिले, जो पूरे करियर में उनके साथ रहे।

मिग-21 की ताकत और विवाद

जहां एक ओर मिग-21 को भारतीय आसमान का “रक्षक” कहा गया, वहीं दूसरी ओर इसे दुर्घटनाओं के चलते “फ्लाइंग कॉफिन” की उपाधि भी मिली। कई दशकों में इसकी तकनीकी चुनौतियों और पुरानी होती संरचना के कारण कई हादसे हुए।

लेकिन इसके बावजूद यह विमान वायुसेना का अभिन्न हिस्सा बना रहा, क्योंकि यह न केवल तेज था बल्कि दुश्मनों के लिए भय का कारण भी।

निष्कर्ष

62 साल की सेवा के बाद मिग-21 का रिटायर होना भारत की वायुसेना के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है। इस विमान ने हमें लड़ाई जीतने का आत्मविश्वास दिया और देश की सुरक्षा मजबूत की।

देहरादून के एयर मार्शल जयाल जैसे पायलटों की यादें हमेशा इस विमान के साथ जुड़ी रहेंगी। मिग-21 अब भले ही आसमान से विदा हो गया हो, लेकिन इसकी गूंज और गौरवशाली इतिहास आने वाली पीढ़ियों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेगा।

See also  Uttarakhand Weather Update: उत्तराखंड में मौसम का मिजाज बदला, पर्वतीय जिलों में भारी बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट, मैदानी इलाकों में भी तेज हवाएं
Share This Article
The Uttarakhand Magazine team is a dedicated group of writers, journalists, and digital storytellers united by a shared passion for the land of the Himalayas. Based in Uttarakhand, the team covers everything that defines the spirit of the state — from its rich culture, traditions, and tourism to its people, environment, and development stories.
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

A 5-Day Journey to Kedarnath: From Faith to the Heart of the Himalayas “Why Uttarakhand Should Be Your Next Travel Destination” Panch Prayag Panch Badri History of Gangotri Temple