मारुति सुजुकी ने उत्तराखंड में शुरू की ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक सुविधाएं

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हरिद्वार और ऋषिकेश में नए ADTT केंद्रों का उद्घाटन, सड़क सुरक्षा और लाइसेंस परीक्षण में सुधार की पहल

मारुति सुजुकी ने उत्तराखंड में अपनी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) पहल के तहत हरिद्वार और ऋषिकेश में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक (ADTT) की शुरुआत की है। इन केंद्रों का उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किया गया। इन आधुनिक ट्रैक्स का उद्देश्य ड्राइविंग लाइसेंस परीक्षण को अधिक सटीक, पारदर्शी और कुशल बनाना है।

ADTT सेंटर में हाई-डेफिनिशन कैमरे और इंटीग्रेटेड आईटी सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के ड्राइवरों का मूल्यांकन किया जा सकता है। ये सुविधाएं लाइट मोटर व्हीकल (LMV) और दोपहिया वाहनों के लाइसेंस परीक्षण के लिए उपलब्ध हैं। परीक्षण पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड होता है और सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स (CMVR) के अनुरूप होता है।

परिवहन सचिव श्री बृजेश कुमार सन्त ने कहा,
“हम उत्तराखंड की सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, और मारुति सुजुकी के ADTT केंद्र इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। देहरादून में 2009 में स्थापित इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च के साथ हमारी साझेदारी की शुरुआत हुई थी। अब ADTT की मदद से हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि केवल योग्य और प्रशिक्षित ड्राइवरों को ही लाइसेंस मिले।”

मारुति सुजुकी के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (कॉरपोरेट अफेयर्स) राहुल भारती ने कहा,
“पर्यटन को बढ़ावा देने और सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए कुशल ड्राइवरों की आवश्यकता है। हमारी यह पहल ड्राइविंग टेस्ट प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी और विश्वसनीय बनाती है, जिससे केवल सक्षम ड्राइवरों को ही लाइसेंस मिलेगा। हम उत्तराखंड सरकार के सहयोग के लिए आभारी हैं।”

मारुति सुजुकी देहरादून में 2019 से एक ADTT चला रही है, जिसे गुड गवर्नेंस और एक्सीलेंस अवॉर्ड भी मिला है। इसके अलावा, कंपनी चारधाम यात्रा से पहले व्यावसायिक ड्राइवरों के लिए रिफ्रेशर ट्रेनिंग प्रोग्राम भी चला रही है, जिसमें अब तक लगभग 11,000 ड्राइवरों को प्रशिक्षित किया गया है। यह प्रशिक्षण यात्रा के लिए आवश्यक ग्रीन कार्ड प्राप्त करने की पूर्व-शर्त है।

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देहरादून में शुरुआती वर्षों में ड्राइविंग टेस्ट पास करने का प्रतिशत 60% तक गिर गया था (FY 2019-20 में), लेकिन अब यह बढ़कर 69% हो गया है, जो यह दर्शाता है कि समय के साथ ड्राइवरों की तैयारी में सुधार हुआ है।

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