हरिद्वार में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिवभक्तों का किया स्वागत, कांवरियों के धोए चरण, की भजन संध्या में भागीदारी
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को हरिद्वार पहुंचकर देशभर से आए कांवड़ यात्रियों का पारंपरिक ढंग से स्वागत किया। उन्होंने ओम ब्रिज के पास स्थित गंगा घाट पर शिवभक्तों के चरण धोकर उन्हें सम्मानित किया और उनके सेवा का अवसर मिलना अपना सौभाग्य बताया।
सीएम धामी ने इस अवसर पर कहा, “शिवभक्तों के चरण धोकर आशीर्वाद लेना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। शिव की कृपा से ही यह पुण्य अवसर प्राप्त हुआ है।” उन्होंने हरिद्वार-रूड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) और हरिद्वार पुलिस सहित सभी प्रशासनिक अधिकारियों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।
मुख्यमंत्री ने गंगा किनारे आयोजित भजन संध्या में भी हिस्सा लिया और श्रद्धालुओं के साथ भक्ति रस में डूबे। उन्होंने कहा कि श्रावण मास में शिव की आराधना का प्रभाव विशेष रूप से फलदायी होता है। हर वर्ष देश के कोने-कोने से लाखों शिवभक्त हरिद्वार पहुंचकर गंगाजल लेकर जलाभिषेक के लिए निकलते हैं। यह यात्रा सिर्फ भक्ति नहीं, सेवा और पुण्य का भी प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष अब तक एक करोड़ से अधिक कांवरिए हरिद्वार से जल लेकर अपने गंतव्यों की ओर रवाना हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में न केवल विकास के कार्य हो रहे हैं, बल्कि संस्कृति और आस्था के पुनर्जीवन के लिए भी कई महत्वपूर्ण पहलें की जा रही हैं। चाहे वह काशी विश्वनाथ कॉरिडोर हो, अयोध्या में राम मंदिर, उज्जैन में महाकाल लोक, या फिर उत्तराखंड के केदारनाथ और बद्रीनाथ का पुनर्निर्माण — हर दिशा में कार्य प्रगति पर है।
सीएम धामी ने यह भी कहा कि आदि कैलाश यात्रा को वैश्विक पहचान दिलाने का कार्य भी प्रधानमंत्री मोदी ने ही किया है। वह पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने 17,500 फीट की ऊंचाई पर जाकर आदि कैलाश और पार्वती कुंड के दर्शन किए।
उन्होंने जानकारी दी कि भविष्य में हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिससे हरिद्वार की धार्मिक और सांस्कृतिक छवि को एक भव्य रूप मिलेगा, जैसे कि आज काशी और अयोध्या का रूप बदला है।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आस्था और अनुशासन का प्रतीक है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि यात्रा के दौरान किसी को कोई असुविधा न हो, इसका ध्यान रखें और यात्रा के नियमों का पालन करें।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस यात्रा के उद्देश्य को भुलाकर अशांति और अनुशासनहीनता का रास्ता अपना रहे हैं, जो एक सच्चे शिवभक्त की पहचान नहीं है। एक सच्चा भक्त विनम्र और संयमी होता है — तभी वह शिव तत्व को भीतर जागृत कर पाता है।
मुख्यमंत्री ने अंत में प्रार्थना करते हुए कहा, “भगवान भोलेनाथ से मेरी प्रार्थना है कि यह कांवड़ यात्रा सभी भक्तों में शिवभाव जागृत करे और समाज में शांति व भक्ति का संदेश दे। देवभूमि उत्तराखंड आप सभी का स्वागत करती है और आपकी सेवा को अपना सौभाग्य मानती है।”