Haridwar Mortuary Negligenceका यह मामला पूरे उत्तराखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है। हरिद्वार जिला अस्पताल की मोर्चरी में चूहों द्वारा शव को कुतर दिया जाना न केवल गंभीर लापरवाही है, बल्कि व्यवस्थाओं की पोल खोलने वाली घटना भी है।
ज्वालापुर की पंजाबी धर्मशाला के मैनेजर लखन शर्मा उर्फ लकी (36) को शुक्रवार शाम अचानक हृदयगति रुकने के कारण अस्पताल लाया गया था। समय बीत जाने के कारण पोस्टमार्टम अगले दिन के लिए टाल दिया गया, और शव को मोर्चरी में सुरक्षित रख दिया गया — लेकिन यह सुरक्षा केवल कागज़ों में ही थी।
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1. परिजन सुबह मोर्चरी पहुंचे तो उड़ गए होश
शनिवार सुबह जब परिवारजन पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के लिए मोर्चरी पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि शव के चेहरे, सिर और एक आंख पर गहरे घाव मौजूद थे। जिस क्षण उन्होंने पास चूहों को दौड़ते देखा, उन्हें साफ़ समझ आ गया कि रात में शव को चूहों ने नुकसान पहुँचाया है।
2. मोर्चरी की सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल
परिजनों का कहना था कि मोर्चरी में सफाई व्यवस्था बेहद खराब है। चूहों की आवाजाही यह दर्शाती है कि शव रखने का स्थान सुरक्षित नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग के लिए यह एक बड़ी चूक है, क्योंकि मोर्चरी में शव का संरक्षण सबसे प्राथमिक जिम्मेदारी होती है।
3. कांग्रेस नेताओं का अस्पताल में पहुंचकर विरोध
घटना की जानकारी मिलते ही कांग्रेस नेता भी अस्पताल पहुंचे और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ कड़ी नारेबाजी की। उन्होंने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए जांच की मांग की।
4. जिम्मेदार अधिकारी मौके से नदारद
हंगामे के दौरान भी स्वास्थ्य विभाग का कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर उपस्थित नहीं हुआ। इससे परिजन और स्थानीय लोग और भी नाराज़ हुए।
5. परिजनों ने की सख्त कार्रवाई की मांग
परिवार और स्थानीय लोगों ने मोर्चरी कर्मचारियों के निलंबन, सुरक्षा व्यवस्था की जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
6. Haridwar Mortuary Negligence ने अस्पताल प्रशासन की पोल खोली
यह घटना स्पष्ट करती है कि जिला अस्पताल में मानिटरिंग, सफाई और सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर है।
ऐसे मामलों के लिए जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है।
7. उत्तराखंड स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल
इस घटना ने एक बार फिर उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि शव मोर्चरी में सुरक्षित नहीं, तो जीवित मरीजों का क्या होगा?