Rapist Father Released From Jail On Bail: जमानत पर जेल से बाहर आया रेपिस्ट पिता, नाबालिग बेटी को केस वापस लेने की दे रहा धमकी

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देहरादून में एक बार फिर इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। एक पिता, जिसने अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म किया था, अब जेल से जमानत पर छूटने के बाद पीड़िता और उसके परिवार को जान से मारने की धमकियाँ दे रहा है। पीड़िता का आरोप है कि उसका पिता लगातार दबाव बना रहा है कि वह पुराने पॉक्सो (POCSO) केस को वापस ले ले, नहीं तो अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे।

पुलिस ने दर्ज किया नया मुकदमा

नेहरू कॉलोनी थानाध्यक्ष संजीत कुमार ने बताया कि लड़की की शिकायत पर आरोपी पिता के खिलाफ धारा 506 (आपराधिक धमकी) और पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है, और परिवार की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

फिलहाल आरोपी फरार चल रहा है, और पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। अधिकारियों ने कहा है कि पीड़िता की सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।

पिछले साल हुआ था दुष्कर्म, तब भेजा गया था जेल

मामले की शुरुआत पिछले वर्ष हुई थी जब देहरादून की एक नाबालिग लड़की ने अपने ही पिता पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। पुलिस ने उस समय आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लेकिन कुछ महीनों बाद अदालत से जमानत मिलने के बाद वह बाहर आ गया।

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बाहर आने के बाद से ही वह अपनी बेटी और पत्नी को धमकाने लगा। पीड़िता का कहना है कि वह अब हर दिन डर में जी रही है — “वह कहता है अगर मैंने केस वापस नहीं लिया तो मुझे और मेरी मां को जान से मार देगा।”

महिला आयोग तक पहुंची गुहार

लड़की ने अपनी शिकायत को लेकर उत्तराखंड राज्य महिला आयोग से भी मदद मांगी है। आयोग ने पुलिस को रिपोर्ट भेजने और जल्द कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। महिला आयोग की सदस्य ने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस को तुरंत एक्शन लेना चाहिए ताकि पीड़िता दोबारा मानसिक उत्पीड़न का शिकार न बने।

देहरादून जैसे शिक्षित शहर में ऐसे मामले चौंकाते हैं

देहरादून, जिसे अक्सर शिक्षा नगरी और शांत पहाड़ी शहर के रूप में जाना जाता है, वहां इस तरह के अपराध समाज को झकझोर कर रख देते हैं। पहाड़ी इलाकों में अब भी बहुत से परिवार ऐसे हैं जहां महिलाएं और बेटियाँ न्याय के लिए आवाज उठाने से डरती हैं, खासकर जब आरोपी खुद परिवार का सदस्य हो।

ऐसे मामलों में समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि पीड़िता को सुरक्षा और मानसिक समर्थन मिले। पुलिस का कहना है कि वह इस केस की वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में जांच कर रही है ताकि कोई भी बाहरी दबाव न्याय प्रक्रिया को प्रभावित न कर सके।

निष्कर्ष

यह मामला एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि क्या जमानत पर छूटने के बाद ऐसे गंभीर अपराधियों को निगरानी में रखना चाहिए? क्या पीड़िता की सुरक्षा के लिए कोई दीर्घकालिक नीति नहीं होनी चाहिए?
देहरादून पुलिस का कहना है कि वह मामले की हर दिशा में जांच कर रही है, लेकिन जब तक आरोपी गिरफ्तार नहीं होता, पीड़िता और उसका परिवार डर के साए में ही रहेंगे।

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