उत्तराखंड सरकार अब हवाई कनेक्टिविटी के क्षेत्र में नई उड़ान भरने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश को आधुनिक और सुरक्षित यात्रा से जोड़ने की योजना तैयार की जा रही है। खास बात यह है कि राज्य के सभी जिला मुख्यालयों और प्रमुख पर्यटन स्थलों को हवाई मार्ग से जोड़ा जाएगा। यह कदम पर्यटन, व्यापार और रोज़गार – तीनों क्षेत्रों में नई संभावनाओं के दरवाजे खोलेगा।
बैठक में बड़े फैसले
सोमवार को सचिवालय में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में एक अहम बैठक हुई। इसमें वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट भाषण में शामिल बिंदुओं की समीक्षा की गई और कई ठोस निर्णय लिए गए।
- सभी जिला मुख्यालयों और पर्यटन स्थलों तक हवाई कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के निर्देश।
- ट्रालियों से आवाजाही वाले स्थलों पर नए पुलों का निर्माण।
- मौजूदा ट्रालियों का सेफ्टी ऑडिट ताकि दुर्घटनाओं की आशंका को कम किया जा सके।
- प्रदेश की सड़कों पर जल्द से जल्द क्रैश बैरियर लगाने के आदेश।
- 13 रोजगार केंद्रों को स्वरोजगार केंद्रों में विकसित करने का निर्णय।
- 50 हजार से अधिक आबादी वाले शहरों और सभी जिला मुख्यालयों में पुस्तकालय स्थापित करने की योजना।
- सभी सरकारी कार्यालयों में ई-ऑफिस लागू करने का निर्देश।
- शिक्षा विभाग को सभी स्कूलों में शत-प्रतिशत फर्नीचर उपलब्ध कराने के आदेश।
पर्यटन को मिलेगा नया पंख
उत्तराखंड को “देवभूमि” कहा जाता है और यहां चारधाम यात्रा, हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी, मसूरी, नैनीताल, औली और पिथौरागढ़ जैसे कई पर्यटन स्थल हैं। लेकिन इन जगहों तक पहुंचना अक्सर यात्रियों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है – कभी संकरी सड़कों के कारण, तो कभी मौसम की वजह से।
यदि राज्य सरकार की यह योजना सफलतापूर्वक लागू होती है तो आने वाले समय में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को इन स्थानों तक पहुंचने के लिए लंबी सड़क यात्राओं से नहीं जूझना पड़ेगा। सीधे हवाई सेवा से समय भी बचेगा और पर्यटन कारोबार को भी नई ऊंचाइयां मिलेंगी।
ट्रालियों का सेफ्टी ऑडिट क्यों जरूरी?
उत्तराखंड के कई पहाड़ी इलाकों में लोग आज भी नदी-नालों और गहरी खाईयों को पार करने के लिए ट्रालियों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, यह तरीका सस्ता और सुविधाजनक तो है, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से बेहद खतरनाक। पिछले कुछ वर्षों में ट्रालियों के हादसों में कई लोगों की जान भी जा चुकी है।
मुख्य सचिव का यह निर्णय कि सभी ट्रालियों का सेफ्टी ऑडिट हो और जहां जरूरी हो, वहां पुल बनाए जाएं – निश्चित रूप से लोगों के जीवन की सुरक्षा के लिए एक अहम कदम है।
रोजगार और शिक्षा पर भी जोर
इस बैठक में सिर्फ परिवहन और सुरक्षा पर ही नहीं, बल्कि रोजगार और शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
- 13 रोजगार केंद्रों को स्वरोजगार केंद्रों में बदलने से स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिलेंगे।
- पुस्तकालयों की स्थापना से खासतौर पर ग्रामीण और छोटे शहरों के छात्रों को पढ़ाई का बेहतर माहौल मिलेगा।
- सभी स्कूलों में फर्नीचर उपलब्ध कराने की योजना बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाएगी।
निष्कर्ष
उत्तराखंड की उड़ान क्रांति सिर्फ एक यात्रा सुविधा नहीं है, बल्कि यह राज्य की समग्र प्रगति की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि सरकार इस योजना को सटीक तरीके से लागू करने में सफल रही, तो आने वाले समय में उत्तराखंड न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया के लिए पर्यटन और विकास का नया केंद्र बन सकता है।