देश-विदेश से हर साल करोड़ों श्रद्धालु हरकी पैड़ी पर गंगा स्नान और दर्शन के लिए आते हैं। यह स्थान सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं, पूरे भारत की आस्था का केंद्र है। अब प्रशासन ने तय किया है कि अक्टूबर 2026 से हरकी पैड़ी पर जूते-चप्पल पहनकर प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित होगा।
यह कदम न केवल धार्मिक पवित्रता बनाए रखने के लिए उठाया गया है, बल्कि सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
छह जगह बनेंगे क्लॉक रूम और मेटल डिटेक्टर
प्रशासन ने योजना बनाई है कि श्रद्धालु अपने जूते-चप्पल क्लॉक रूम में सुरक्षित रखकर टोकन के माध्यम से जमा करेंगे और फिर नंगे पांव गंगा दर्शन करेंगे।
यह सुविधा छह मुख्य प्रवेश द्वारों पर उपलब्ध होगी:
- पंतद्वीप
- अपर रोड
- कांगड़ा घाट
- सीसीआर शिव सेतु
- संजय पुल
- हाथी पुल के दोनों ओर
हर प्वाइंट पर क्लॉक रूम के साथ-साथ मेटल डिटेक्टर लगाए जाएंगे और पुलिस बल की तैनाती भी होगी।
श्रद्धालुओं के लिए आसान व्यवस्था
भीड़ के बीच अक्सर श्रद्धालुओं को असुविधा होती है। नंगे पांव चलने में दिक्कत न हो, इसके लिए पूरे हरकी पैड़ी क्षेत्र में मैट बिछाई जाएगी।
इसके अलावा, घाट क्षेत्र में अवैध फड़, भीख मांगने वालों और लावारिस पशुओं का प्रवेश भी पूरी तरह वर्जित रहेगा।
टोकन सिस्टम से सुरक्षा
क्लॉक रूम में आधुनिक टोकन प्रणाली लागू की जाएगी। इससे श्रद्धालुओं को अपने जूते-चप्पल खोने की चिंता नहीं रहेगी। यह व्यवस्था बड़े शहरों के एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन जैसी हाई-टेक होगी।
धार्मिकता और पवित्रता का सवाल
हरकी पैड़ी को गंगा स्नान और पूजा-अर्चना का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। यहां लाखों लोग “हर की पौड़ी आरती” देखने आते हैं।
मेरे अनुसार, यह फैसला सही समय पर लिया गया है। कई बार देखा गया है कि श्रद्धालु जूते-चप्पल पहनकर घाट तक पहुंच जाते हैं, जिससे धार्मिक भावना आहत होती है। यह नया नियम हरकी पैड़ी की आध्यात्मिक गरिमा को और सशक्त करेगा।
सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन
हरिद्वार में हर साल कुंभ और अर्धकुंभ जैसे महापर्व आयोजित होते हैं। इन दौरान लाखों-करोड़ों श्रद्धालु एक साथ हरकी पैड़ी पहुंचते हैं।
भीड़ और सुरक्षा की दृष्टि से मेटल डिटेक्टर, पुलिस कर्मियों की तैनाती और व्यवस्थित प्रवेश द्वार बेहद अहम हैं। प्रशासन का यह निर्णय भविष्य में होने वाले बड़े आयोजनों की तैयारी के तौर पर भी देखा जा सकता है।
स्थानीय लोगों की राय
हरिद्वार के स्थानीय दुकानदार और पंडा समाज का कहना है कि यह निर्णय गंगा घाट की मर्यादा को बनाए रखने में मदद करेगा। हालांकि, कुछ लोगों की चिंता यह भी है कि क्लॉक रूम की व्यवस्था यदि समय पर और व्यवस्थित नहीं हुई, तो यात्रियों को लंबी कतारों में परेशानी उठानी पड़ सकती है।
निष्कर्ष
अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली यह नई व्यवस्था हरकी पैड़ी के धार्मिक स्वरूप, श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा—तीनों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
मेरी नजर में, यह सिर्फ एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि आस्था और अनुशासन के संतुलन का उदाहरण है। जब करोड़ों लोग एक जगह जुटते हैं, तो वहां नियम और अनुशासन ही सबसे बड़ी ताकत बनते हैं।