Uttarakhand Weather forecast: उत्तराखंड में नदियां उफान पर, दरकते पहाड़; कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

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Uttarakhand Weather forecast: उत्तराखंड में नदियां उफान पर, दरकते पहाड़; कई जिलों में भारी बारिश का अलर्टउत्तराखंड में मॉनसून इस समय अपने चरम पर है। मौसम विभाग ने आज देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी और पौड़ी में भी तेज बारिश और भूस्खलन की संभावना जताई गई है।

कुमाऊं मंडल सबसे ज्यादा प्रभावित

मौसम विभाग का कहना है कि कुमाऊं क्षेत्र के बागेश्वर और पिथौरागढ़ में बारिश का जोर और बढ़ने वाला है। इन इलाकों में नदी-नालों के उफान और पहाड़ दरकने की आशंका सबसे ज्यादा है। तेज हवाएं (40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा) और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा भी बना हुआ है। प्रशासन ने लोगों को नदियों के किनारे और संवेदनशील ढलानों से दूर रहने की अपील की है।

गढ़वाल क्षेत्र में भी अलर्ट

गढ़वाल मंडल के रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी और पौड़ी जिलों में बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इन जिलों में पहले से ही कई जगहों पर सड़कों पर मलबा आने से यातायात प्रभावित हुआ है। अलकनंदा समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। कुछ दिन पहले ही रुद्रप्रयाग में अलकनंदा नदी खतरे के निशान को पार कर चुकी थी, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजना पड़ा था।

तेजी से बदल रहा मौसम

उत्तराखंड में इस साल मॉनसून ने सामान्य से एक हफ्ता पहले यानी 21 जून को दस्तक दी थी। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक अरब सागर से नमी खींचने वाली ट्रफ लाइन अभी सक्रिय है, जिसके चलते आने वाले दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। खासतौर पर 29 अगस्त के बाद कुमाऊं क्षेत्र में बारिश और तेज होने की संभावना है। हालांकि अगस्त के अंत तक धीरे-धीरे बारिश की तीव्रता कम हो सकती है, लेकिन अचानक मौसम बदलने का खतरा बरकरार रहेगा।

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मेरा दृष्टिकोण और स्थानीय सच्चाई

मैंने कई बार उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों का दौरा किया है और देखा है कि बारिश का मौसम यहां रहने वाले लोगों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता। पहाड़ी सड़कों पर सफर करना बेहद जोखिम भरा हो जाता है। गांवों में अक्सर रास्ते बंद हो जाते हैं और लोगों को कई किलोमीटर पैदल चलकर जरूरी सामान लाना पड़ता है।
दरअसल, उत्तराखंड की खूबसूरती उसकी नदियों और पहाड़ों में ही बसती है, लेकिन यही नदियां और यही पहाड़ बरसात में डर का कारण भी बन जाते हैं। मेरा मानना है कि हमें सिर्फ अलर्ट जारी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। स्थानीय स्तर पर मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग और आधुनिक मौसम चेतावनी तंत्र बनाना बहुत जरूरी है।

निष्कर्ष

उत्तराखंड का मौसम हमेशा से अनिश्चित माना जाता है, लेकिन मॉनसून के दौरान खतरा और बढ़ जाता है। इस वक्त सबसे ज्यादा जरूरी है कि लोग सतर्क रहें, प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और अनावश्यक यात्राओं से बचें। प्रकृति को हम रोक नहीं सकते, लेकिन सतर्कता और तैयारी से नुकसान को जरूर कम कर सकते हैं।

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