देहरादून में सूर्य ड्रोन टेक-2025 कार्यक्रम में 39 गोरखा ट्रेनिंग सेंटर द्वारा विकसित 3D प्रिंटेड ड्रोन प्रदर्शित

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वाराणसी के 39 गोरखा ट्रेनिंग सेंटर ने हल्के और 3D-प्रिंटेड निगरानी ड्रोन तैयार किए हैं, जिन्हें सूर्य ड्रोन टेक-2025 कार्यक्रम में प्रदर्शित किया गया। ये ड्रोन केंद्र द्वारा ही डिजाइन और तैयार किए गए हैं, और इनकी खासियत है कि इनके पार्ट्स आसानी से बदले जा सकते हैं

इन ड्रोन की 10 किलोमीटर रेंज है, 20 से 30 मिनट तक की बैटरी लाइफ है और वीआर तकनीक से लैस हैं, जिससे ज़मीन पर मौजूद जवानों को लाइव वीडियो फीड मिलती है।

देहरादून में ‘सूर्य ड्रोन टेक–2025’ में सेना ने दिखाया 3D प्रिंटेड निगरानी ड्रोन का कमाल

देहरादून: वाराणसी स्थित 39 गोरखा ट्रेनिंग सेंटर (GTC) ने हल्के वजन वाले 3D प्रिंटेड निगरानी ड्रोन विकसित किए हैं, जिनके टूटे हुए हिस्सों को तुरंत बदला जा सकता है। यह खासियत संकट की स्थिति में समय पर और प्रभावी प्रतिक्रिया देने में मदद करती है।

इन ड्रोन को देहरादून में 29-30 अप्रैल तक आयोजित दो दिवसीय ‘सूर्य ड्रोन टेक–2025’ कार्यक्रम में प्रदर्शित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन भारतीय सेना की सेंट्रल कमांड और सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) द्वारा उत्तराखंड सब एरिया में किया गया।

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ड्रोन की कार्यक्षमता का लाइव डेमो भी किया गया, जिसमें उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह, सेंट्रल कमांड के जीओसी-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

सेना के जवानों ने ही तैयार किया ड्रोन

39 GTC के लेफ्टिनेंट कर्नल विशाल भाटिया ने बताया कि ये ड्रोन पूरी तरह से सेना के जवानों द्वारा डिजाइन और निर्मित किए गए हैं। ड्रोन की संरचना 3D प्रिंटर से तैयार की जाती है, जिसमें एक दिन का समय लगता है। इसके बाद बैटरी, फ्लाइट कंट्रोलर जैसे अन्य हिस्से जोड़े जाते हैं। फिलहाल ये ड्रोन सिर्फ निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि 3D प्रिंटिंग तकनीक की मदद से कोई भी टूटा हुआ पार्ट आसानी से और जल्दी बदला जा सकता है। इन ड्रोन की रेंज 10 किलोमीटर तक है और बैटरी बैकअप 20 से 30 मिनट का है, जो बैटरी की क्षमता पर निर्भर करता है। ये लाइव फीड भेजने में सक्षम हैं और वर्चुअल रियलिटी (VR) सक्षम तकनीक से लैस हैं।

भाटिया ने यह भी बताया कि इन ड्रोन को इतना सरल बनाया गया है कि 10वीं पास एक इन्फेंट्री सिपाही भी इन्हें चला सकता है। साथ ही, अब एक वायर्ड ड्रोन भी विकसित किया जा रहा है जो ड्रोन जैमिंग टेक्नोलॉजी का सामना कर सकेगा।

AI से लैस कैमरा भी रहा आकर्षण का केंद्र

39 GTC के अलावा गुजरात की कंपनी ‘ऑप्टोमाइज़्ड इलेक्ट्रोटेक’ ने एक AI-आधारित निगरानी कैमरा डिवाइस ‘Noctvision’ प्रदर्शित की। कंपनी के मार्केटिंग प्रमुख शिवांग मिश्रा ने बताया कि यह डिवाइस चेहरे की हड्डियों की बनावट को पढ़कर भीड़ में से किसी व्यक्ति की पहचान करने में सक्षम है — चाहे भीड़ में 5 लाख लोग ही क्यों न हों।

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यह डिवाइस दिन में 12 किलोमीटर और रात में 6 किलोमीटर तक वाहन या ड्रोन का पता लगाने में सक्षम है। इसमें थर्मल इमेजिंग कैमरे लगे हैं, जो अंधेरे में भी लक्ष्य पहचान सकते हैं। सिर्फ एक तस्वीर अपलोड कर देने से यह सिस्टम संदिग्ध व्यक्ति को पहचान सकता है और पूर्व चेतावनी देकर एंट्री रोकने में मदद कर सकता है। यह डिवाइस पहले से ही गुजरात पुलिस और दमण-दीव पुलिस द्वारा इस्तेमाल की जा रही है।

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